APPENDIX


सूत्रों में प्रयोग किये गये कुछ विशेष-चिह्न:-


'/' तथा '[ ]' : ये दोनों चिह्न शब्दों में विकल्पता के द्योतक हैं. किन्तु
दोनो ही अलग अलग प्रकार की विकल्पता बताते हैं.

	'/'   : यह चिह्न एक शब्द के विभिन्न अर्थों के मध्य लग कर उनमें
	विकल्प दिखाता है और यह इस बात का सूचक है कि दिये गए अर्थ एक
	दूसरे से असम्बद्ध हैं. जैसे :-
	
		 "lie","1.झूठ~बोलना/लेटना"
              
		यहाँ 'lie' शब्द के दो अर्थ हैं 'झूठ~बोलना' और 'लेटना'
		किन्तु इनमें परस्पर कोई सम्बन्ध नहीं है. यह सिर्फ एक
		इत्तफाक है कि अंग्रेज़ी में दोनों ही शब्दों के लिये एक
		शब्द है. अंग्रेज़ी में भी ये शब्द मूलतः अलग अलग थे 
		किन्तु विकास क्रम में कहीं एक रूप हो गये.
             

	'[ ]'  : यह चिह्न भी दिये गये अर्थों के बीच विकल्पता दिखाता है
	किन्तु यहाँ दिये गये अर्थ परस्पर सम्बंधित होते हैं. उदाहरण :

               अनुच्छेद[~मार्ग{क्रिया}]

                यहाँ संदर्भ अनुसार 'अनुच्छेद' तथा मार्ग में से कोई एक
                अर्थ चुना जा सकता है. '~' यह बताता है कि 'मार्ग' से
                'अनुच्छेद' तक पहुँचने के क्रम में कुछ मोड़ हैं किन्तु
                दोनो अर्थ आपस में सम्बन्धित अवश्य हैं.


'~[ ]"     : यह चिह्न भी कोष्ठकों के बीच दिये गये शब्दों की विकल्पता
	बताता है. किन्तु यहाँ विकल्पता कोष्ठकों के अन्दर और कोष्ठकों के बाहर
	के शब्दों में नहीं होती. जहाँ यह चिह्न होता है वहाँ कोष्ठकों के बाहर 
	वाला शब्द हमेशा आता है. कोष्ठकों के अन्दर आनेवाला शब्द अपने आप में 
वैकल्पिक होता है. अर्थात् वह आये या न आये यह संदर्भ पर निर्भर करता है. उदाहरण के लिये :

	 	प्रकाश~[के~योग्य~करना]

	   यहाँ 'के~योग्य करना' दरअसल 'प्रकाश' से जुड़ा
	   है. संदर्भानुसार या तो मात्र 'प्रकाश' चुना जा सकता है, या
	   'प्रकाश~के~योग्य~करना'. 'प्रकाश' और 'के~योग्य~करना' में 
           से कोई एक आये ऐसा विकल्प नहीं है.


'<' तथा '>' : ये दोनों चिह्न शब्द के स्रोत की दिशा के संकेतक हैं.

	'<'   : इस चिह्न की दाँयी ओर लिखा शब्द स्रोत शब्द होता है. 
		उदाहरणार्थ :-
                
               "absorb","सोख`[<अन्दर~खीचना]"

                यहाँ '<' चिह्न यह बता रहा है कि अंग्रेज़ी शब्द 'absorb'
                का मूल अर्थ तो 'अन्दर~खींचना' है. इस स्रोत से अर्थ विकास
                क्रम में 'सोख' तक पहुँचा है.

	'>'   : इस चिह्न की बाँयी ओर लिखा शब्द संकेतक है. उदाहरणार्थ :-

                "fire","आग~[>फेंकना]~लगाना"

               यहाँ 'आग' स्रोत है तथा 'फेंकना' अर्थ विकास क्रम में
               'आग' से प्रजनित अर्थ है.


'~'   : यह चिह्न मूल से अर्थ बदलने के मोड़ों को संकेतित करता है. यह एक
या उससे अधिक भी हो सकते हैं. एक से अधिक '~' अर्थ बदलने के मोड़ों की
बाहुल्यता के द्योतक हैं.

	"issue","विषय[~~<निष्पादन]"

	यहाँ '~~' चिह्न यह संकेत कर रहे हैं कि 'issue' शब्द का 'स्रोत'
	तो 'निष्पादन' है और वह अर्थ विकास क्रम में कई मोड़ लेते हुए
	'विषय' तक पहुँचा है.


'{ }' : ये कोष्ठक किसी शब्द के बारे में अतिरिक्त सूचना देते हैं.

       अनुच्छेद[~मार्ग{क्रिया}]

	यहाँ 'मार्ग' के बाद '{ }' कोष्ठकों में दिया गया शब्द 'क्रिया'
	यह अतिरिक्त सूचना दे रहा है कि 'मार्ग' शब्द में उसका 'क्रिया'
	होना समाहित है.


'`'   : शब्दों के बाद आया यह चिह्न कहता है कि इस शब्द में कुछ अधिक
अर्थ समाहित है जिसके बारे में जानकारी 'help' से ली जा सकती. उदाहरण :-
     
   	ताला`

	यहाँ 'ताला`' शब्द में 'ताला' अर्थ के अतिरिक्त 'बाँध' का अर्थ भी
	समाहित है. और यह सूचना 'help' में देखने से मिल सकती है.


'{7}' : कोष्ठकों के बीच दी संख्याएँ 'कारक' द्योतक हैं. यहाँ दी गयी
संख्या '{7}' अधिकरण कारक की सूचना दे रही है. इसीप्रकार '{5}' अपादान,
'{2}' कर्म इत्यादि के द्योतक होंगे. उदाहरण:-

	अनुच्छेद[~गुज़रना{7}]


'*'   : यह चिह्न इस बात का द्योतक है कि यहाँ कई सम्भावनाएँ हैं और
संदर्भअनुसार उचित सम्भावना को जोड़ा जाना चाहिये. उदाहरण :-

	"term","निश्चित_*_सीमा"

	यहाँ '*' यह बता रहा है कि 'term' शब्द में एक 'निश्चित~सीमा'
	का अर्थ है, जो 'शब्द' में हो सकती है, 'शर्त' में हो सकती है,
	'अवधि' में हो सकती है. संदर्भअनुसार जो भी उचित है वह '*' के
	स्थान पर आएगा.

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